मुहब्बत जब सच्ची हो तो

This is a message to all lover’s from me, please try to understand the depth of this poem. And i need your valuable comments on it ……..

मुहब्ब्त जब सच्ची हो तो धड़कने  जुड़ जाती है,

सांसो में बहकर रोज प्यार के नगमें  सुनाती है.

धड़क धड़क कर उसके भी दिल का हाल बताती है,

कहीं भी हो हम मगर उसकी याद बहुत सताती है.

खुली आँखों से भी देखो तो सिर्फ वही नजर आती है,

बंद करो तो मन की आँख उसी का चेहरा दिखाती है.

लैला मजनू की कहानी भी यही मुहब्बत सिखाती है,

स्कूल में मार पड़े गर जो कैस के हाथो पे, 

मगर चोट लैला के हाथो में उभर आती है.

जो मीरा करे मुहब्बत कृष्णा से तो वो,

सबके आगे मूर्ति में जिन्दा समां जाती है.

मुहब्बत करो पर समझो तो सही ठीक से,

कैसे गहरी और सच्ची मुहब्बत की जाती है.         

जब ये घडी मुहब्बत में हासिल हो जाती है,

तो ये रब की नेक एक इबादत  बन जाती है.

सो सच्ची मुहब्बते तो मिसालें बन जाती है,

और बाकि सब आजकल सेटिंग कहलाती हैं.

तो दोस्तों मुहब्बत करो लेकिन सच्चाई से,

ना खेलना दिल से किसी के कभी सफाई से.

झूठ से बचना तुम और डरना भी बेवफाई से,

मेरी ये कविता तो सबको यही समझाती है….

4 thoughts on “मुहब्बत जब सच्ची हो तो

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