खुद की रूह में बसाया था तुमको

This poem is related to depth of real 4 ever love , a corner of my heart. so friends plz read it and tell me how much you like it n give me your valuable suggestions, your always welcome.

खुद की रूह में गहराई तक बसाया था तुमको,

जिन्दगी का अपनी मालिक बनाया था तुमको.

पैरों को धूल तक  ना छू सके तुम्हारे कभी भी  ,

इसलिए पलकों पे अपनी बैठाया था तुमको .

तुम इतने दिन में भी ना समझ पाए मुझे,

पहली ही नजर में मैंने चाहत बनाया था तुमको.

मैंने किये जो वादे तुमसे वो सभी थे निभाए,

फिर क्यूँ हो गए आप अलग हमें बिन बताये.

चाहना मेरी गलती थी या तुम पे भरोसा करना,

खुद से पूछकर इक बार आप हमें भी तो बताएं.

         

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