मत छोड़ो तुम पत्थर को पर

This is a request to all Kashmiri people please read it and try to understand.we all Indian government , Indian forces or  all people in whole universe like peace and want to see heaven in Kashmir again. so please ……….

मत छोड़ो तुम अपने हाथों से पत्थर को पर,

इतना तो समझ लो की दुश्मन कौन तुम्हारा है.

न मजहब है इनका कोई,न वतन है इनका कोई,

बस गन्दी राजनीति के लिए किया शोषण तुम्हारा है.

वतन भी जो इनका पाक होता तो ये जाके वहां  बस जाते,

जो होता इन्हें मजहब से भी प्यार तो इंसानियत तुम्हें  सिखाते.

बस अपने निज स्वार्थ के लिए केवल न तुम्हें कभी बरगलाते,

गर ये होते तुम्हारे अपने तो तुम्हारे लिए कुछ तो काम करते.  

रोजगार पैदा करते, विकास करते, तुम्हारे लिए कुछ तो आराम करते,

है जो सर पे नक़्शे में कहलाता था जो कश्मीर कभी धरती का स्वर्ग.

इस साख को तो आगे बढ़ाते देकर पत्थर हाथ में न अपनी माँ को लजाते

अमन करके यहाँ कायम पर्यटन को नयी ऊँचाई पे ले जाते.

रोजगार मिलते आप लोगो को फिर क्यूँ आप पत्थर चलाते,

खुशियाँ खिलती जिन्दगी में और तुम भी मातृभक्त कहलाते.

सोचो भी और समझो भी सही कौन है सच में दुश्मन तुम्हारा,

वो जो तुम्हारी जरूरत (अमन) है या जो करता इस्तेमाल तुम्हारा है.

तुम्हारी पहचान तो धरती के स्वर्ग से होती थी कभी,

खुद से करो सवाल तुम की क्या यही पूरा सच नहीं.

अपनी पहचान को अब वापिस पाओ घाटी को दुबारा स्वर्ग बनाओ,

नक़्शे में हो सर पे तुम देके साथ इसे भारत माँ का ताज बनाओ.

न किसी के चन्द टुकड़े लेकर तुम हाथो में पत्थर उठाओ,

गर रोके ये दल्ले दुबारा तुम्हे तो इन्हें ही निशाना बनाओ.

असली दुश्मन यही है तुम्हारे न मजहब न ईमान इनका,

समझ के इनको अच्छे से कर दो नेस्तानाबूद इरादा तिनका.

तुम्हारे हाथ जुड़े तो स्वागत के लिए फिर पूरा चमन तुम्हारा है,

तुम करो संकल्प आज अमन पसंद लोगो की तरफ से सन्देश हमारा है.

A request to all readers  if you are agree with this then like it and share it everywhere through social media to reach every pattharbaj of Kashmir.

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