ख़ामोशी की जुबान

Good evening friends this is a poem about silence power of love read it and tell me your thoughts about this.love you all ! I need your blessings always……….

ख़ामोशी की अपनी एक अलग ही खास जुबान होती है,

हाल ऐ दिल की भी बस आँखों से ही पहचान होती है.

अगर वो खामोश बैठे रहते कुछ वक़्त और देर तक,   

तो उनके लिए धड़कने हमारी भी परेशान होती है.

उनके रहमो करम से ही तो समझे मुहब्बत को हम,

वरना कब कहाँ इंसान को सच्चाई की पहचान होती है.

लबों के थिरके बिना दोनों दिल की बात समझ लेते हैं,

बिन उनके कुछ कहे भी दिल के जज्बात पकड़ लेते हैं.

चेहरे पे रख के निगाहें बस मन की बात को पढ़ लेते हैं,     

लब खामोश रहके भी सब कुछ बयान कर ही देते हैं.

वो भी तोड़ देते हैं ख़ामोशी हमें कब परेशान होने देते हैं……..

©100rb

3 thoughts on “ख़ामोशी की जुबान

  1. Madhusudan says:

    उनके रहमो करम से ही तो समझे मुहब्बत को हम,

    वरना कब कहाँ इंसान को सच्चाई की पहचान होती है–हर लाईन जबर्दस्त।

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