बड़ी ही अजीब कशमकश है !

 

हमारी मुहब्बत सच्ची है उसे !

हम भुला भी तो नहीं सकते !!

दर्द के इस तूफानी अहसास को !

हम छुपा भी तो नहीं सकते !!

पर कहीं वो बदनाम ना हो जाये !

इस वजह से बता भी नहीं सकते !!

चोट दिल के अंदर बहुत गहरी है !

हम सारी दिखा भी तो नहीं सकते !

ये कागज कलम तो बहुत छोटे है !!

दर्द सारा इनपे सजा भी तो नहीं सकते !

ये बड़ी ही अजीब कशमकश है !!

खुद को डूबा भी तो नहीं सकते !

खुद को बचा भी तो नहीं सकते !!

©100rb

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