jehaad or pure terrosim ?

जेहाद या शुद्ध आतंकवाद ?

ये कैसा जेहाद है !!

जो तेरी आँखों में बस खून सवार है !

निहत्थों पर भी तू करता वार है !

ये कैसा जेहाद है !!

किस मजहब किस धरम ने बताया !

तुमको ये नरसहांर है !

ये कैसा जेहाद है !!

तुम में दम होता तो बॉर्डर पे तुम लड़ने जाते !

कभी ना नपुन्सकों जैसी हरक़तें दोहराते !

तुमने इंसानियत भी कर दी शर्मसार है !

ये कैसा जेहाद है !!

इस ब्रह्माण्ड की कायराना जलील अपनी करतूत पर !

पीठ अपनी खुद ही थपथपाता बार बार है !

ये कैसा जेहाद है !!

क्या बिगाड़ा था तेरा उन शिव भक्तों ने !

क्यूँ करता तू पीठ पीछे वार है !

ये कैसा जेहाद है !!

अबलाओं की इज्जत से खेलते हो तुम !

लव जेहाद तुम्हारी इस गलत सोच का आधार है !

ये कैसा जेहाद है !!

धरम की बातें पीछे करना पहले देख !

तेरी रगों का खून भी हो चुका बेकार है !

ये कैसा जेहाद है !!

धरम की किताबें पढ़ी हैं तुमने !

आतंकवाद के गलियारों में !

तुझे तो बताने वाले ही मक्कार हैं !

ये कैसा जेहाद है !!

मजहब के नाम पे बरगला के

बन्दूक तेरे हाथों में थमा के

वो धरम के घटिया वाकिफकार हैं

ये कैसा जेहाद है !!

तू कभी खुद से समझ तो सही मजहब को !

इस्लाम को आखिर तू भी तो एक इंसान है !

ये कैसा जेहाद है !!

उन्ही मजहब के गलत पैरवीकारों ने !

बना दिया तुम्हें आतंकी शैतान है !

ये कैसा जेहाद है !!

जय हिन्द ! जय मानवता ! जय हिन्दुस्तान !

©100rb

3 thoughts on “jehaad or pure terrosim ?

  1. Madhusudan says:

    ये कैसा जेहाद है !!

    जो तेरी आँखों में बस खून सवार है !

    निहत्थों पर भी तू करता वार है !

    ये कैसा जेहाद है —-सही कहा ये कैसा जेहाद।

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