kailash pe bhaithe hain कैलाश पे बैठे हैं !!

भोले बाबा बड़े निराले जटा में गंग संभाले !

कैलाश पे बैठे हैं !!

पीकर वो तो भंग के प्याले मुस्काये मतवाले !

कैलाश पे बैठे हैं !!

माथे पे हैं चन्द्र विराजे गले में सर्प को डाले !

कैलाश पे बैठे हैं !!

हाथों में वो पकड़ के डमरू तांडव करे निराले !

कैलाश पे बैठे हैं !!

पीकर वो तो जहर के प्याले बने सब के रखवाले !

कैलाश पे बैठे हैं !!

काया पर वो भस्म रमा के करते काम निराले !

कैलाश पे बैठे हैं !!

भक्तों के सब काम बनाते सब कुछ देने वाले !

कैलाश पे बैठे हैं !!

पार्वती के प्रीतम प्यारे हैं तीनो लोक संभाले !

कैलाश पे बैठे हैं !!

सदा ध्यान में डूबे रहते योगी बड़े निराले !

कैलाश पे बैठे हैं !!

घुटने पर हैं गणेश बिठाये पहिने मृग की छालें !

कैलाश पे बैठे हैं !!

भूत प्रेत भी भरे हाजिरी अनहोनी को टालें !

कैलाश पे बैठे हैं !!

हम पर भी अब कर दो कृपा तुम हो तारन वाले !

कैलाश पे बैठे हैं !!

©100rb

9 thoughts on “kailash pe bhaithe hain कैलाश पे बैठे हैं !!

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