kya vasna prem hai ?

वो जिस्मों को हमें मुहब्बत बता बैठे !!

हम रेत पर महल का ख्वाब सजा बैठे !

शायद इकतरफा  दिल उनसे लगा बैठे !!

उन्होंने समझने की कोशिश भी ना की !

हम अपना सब कुछ उस पर लुटा बैठे !!

बानगी तो देखिये उनके प्रेम की !

वो जिस्मों को हमें मुहब्बत बता बैठे !!

कैसे समझा पाते हम उसे प्यार अपना !

वो किसी और से दिल जो लगा बैठे !!

©100rb

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8 thoughts on “kya vasna prem hai ?

  1. Rekha Sahay says:

    बिलकुल सही बात है , दिल की बात बयान करती पंक्तियों –
    बानगी तो देखिये उनके प्रेम की !

    वो जिस्मों को हमें मुहब्बत बता बैठे !!

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  2. Madhusudan says:

    बानगी तो देखिये उनके प्रेम की !

    वो जिस्मों को हमें मुहब्बत बता बैठे !!

    कैसे समझा पाते हम उसे प्यार अपना !

    वो किसी और से दिल जो लगा बैठे !!
    kyaa khub likha hai…….lajwaab……bhawnaao ko byakt karti shandaar kriti.

    Liked by 1 person

  3. pkckd1989 says:

    बहुत ही सुंदर विचार है आपके। यह आजकी सच्चाई है कि लोग देह की भुख को भी प्रेम का नाम देते हैं और अक्सर ऐसे लोगों से ही प्रेम हो जाता हैं जिनके लिए इसके कोई मायने नहीं होते।

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