udas rahta hai..

दिल मेरा बेहिसाब खामोश रहता है !

मगर मुझसे ये  कहाँ  चुप  रहता है !!

अक्सर चीखती  है  खामोशियां मेरी !

बस आँखों से सैलाब बहता रहता है !!

ऐ दिल दुनिया को  जब  कदर  नही !

फिर तू किसके लिए बेजुबां रहता है !!

तेरे पास खुले  हुए  है  तमाम  रास्ते !

तू  क्यू  खुद  में  ही  घुटता  रहता  है !!

जमाना आज  मतलब परस्ती का है !

तू क्यू  उसके  लिए  परेशां  रहता है !!

मुखोटों  से  भरा अपनापन ‘नाचीज़’ !

तू  क्यू  गैरों के लिए उदास रहता है !!

 

 

5 thoughts on “udas rahta hai..

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