माँ तो रब की मेहर है !

Hello to all loving readers and my companion bloggers , how are you?  As you know that I write on real 4 ever love , this poem is on my motherly love n dedicated to all mothers. I know you all loves your mothers but after that you please read all the poem till end and tell me then how is it , one another thing i have used first line from a what,s up message in it .  

 

सन्नाटा छा गया एक बटवारे के किस्से में !

जब पुछा माँ ने की मैं आई किसके हिस्से में !!

बड़ा व छोटा दोनों के चेहरे ही खिसियाने लगे !

वो इशारों से बीवियों से अपनी बतियाने लगे !!

ना रखने की सौ झूठी मजबूरियाँ वो बताने लगे !

रखा जिसने कोख में उसकी कमियां गिनाने लगे !!

जिसने जिन्दगी खर्च कर दी उसे बोझ बताने लगे !

बाहर चली जाये घर से इसलिए बस उसे सताने लगे !!

सोच लो जो आज वक्त इस माँ का है कल तुम्हारा होगा !

तुमने जो दिया इस दुखियारी को सूद समेत तुम्हारा होगा !!

गर उस दिन समझे भी तो कहाँ फायदा कोई तुम्हारा होगा !

आज समझो फर्जों को तुम तो जीवन सफल तुम्हारा होगा !!

वो माँ अब इस उम्र में कहाँ जाए !

जिसने तुम पर अपने दुलार लुटाये !!

अब तो समझ लो माँ के प्यार को !

उसकी ममता के इस अंधे संसार को !!

माँ कोई चीज नहीं फेक दो जिस कबार को !

वो तो रब की मेहर है जो जनती संसार को !!

उसकी सेवा कर लो लगेगी उस पालन हार को !

पहले अपनाओ फिर पीढीयों को दो इसी संस्कार को !!

©100rb

8 thoughts on “माँ तो रब की मेहर है !

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s